निजी निवेशकों के माध्यम से कौशल विकास केन्द्र स्थापित करने की योजना

:: संदर्भ पृष्ठभूमि ::

             व्यापक पैमाने पर रोजगार बढ़ाने तथा तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण को त्वरित गति से बढ़ावा देने के लिए तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास नीति 2012 में निम्नलिखित रणनीति तय की गई हैं|
     -     राज्य सरकार के सीमित संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए एवं निजी शिक्षा प्रशिक्षण प्रदायकर्ताओं के अनुभव एवं क्षमताओं का लाभ लेने की दृष्टि से तकनीकी शिक्षा
          एवं कौशल विकास में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। कौशल विकास के अवसरों में तीव्र वृद्धि एवं उसकी पहुंच तथा दायरे में विस्तार के लिए निजी निवेश
         की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
    -    गैर शासकीय एजेंसियां, संस्थाओं द्वारा संचालित प्रशिक्षण केन्द्रों एवं इच्छुक उद्योगों को वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर हेतु प्रोत्साहित के रूप में पंजीकृत करने किया जाएगा|
1.     अल्प अवधि के कौशल विकास कार्यक्रमों का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विकासखंड में एक एसडीसी की स्थापना करने का लक्ष्य है जिसमें 135 राज्य
        सरकार के संसाधनों से स्थापित किए जा चुके हैं। शेष 178 विकासखंडों में निजी निवेशकों के माध्यम से स्थापित किये जाएंगे।
2.     मध्यप्रदेश वर्तमान में देश में तेजी से विकास कर रहे राज्यों में से एक है। विकास की यह दर बनाये रखने एवं इसमें वृद्धि करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है, कि प्रदेश
        में उपलब्ध जनशक्ति, तकनीकी रूप से प्रशिक्षित एवं विश्वस्तरीय मांग के अनुरूप हो। प्रदेश के युवा आर्थिक विकास में हो रही प्रगति के कारण उपलब्ध अवसरों का लाभ
        उठा सके, इसलिए भी प्रशिक्षण के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराये जाना आवश्यक है।
3.     राष्ट्रीय स्तर के अनेक औद्योगिक संगठनों के मतानुसार वर्तमान में तकनीकी शिक्षण संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षित की जा रही जनशक्ति बाजार एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप
        तथा अपेक्षित गुणवत्ता की नहीं है। आज भी अनेक ऐसे व्यवसाय के क्षेत्र हैं जिनमें अत्यधिक मांग है परन्तु मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देने की क्षमता नहीं है अथवा संस्थाओं
        में उसके अनुरूप पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं है। अतः मांग और पूर्ति में समन्वय स्थापित किया जाना समय की आवश्यकता है। इसकी पूर्ति के लिए योजना प्रस्तावित हैं।

योजना का उददेश्य

-     निजी एजेंसी के द्वारा गुणवत्तायुक्त कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना करना।
-     कौशल विकास केन्द्रों के प्रशिक्षणार्थियों की परीक्षा आईटीआई में।
-     निजी क्षेत्रों के रिर्सोसेस एवं एक्सपर्टाइज का कौशल विकास में उपयोग करना।
-     प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाणित प्रमाणपत्र प्रदान करना।
-     स्थानीय आवश्यकताओं एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप अल्पावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करना।
-     रोजगार के अवसरों को देखते हुए प्रशिक्षण की तत्काल एवं त्वरित सुविधा उपलब्ध कराना।
-     स्थापित संस्थाओं की सीमित क्षमता को दृष्टिगत रखते हुए कौशल विकास के अवसरों में अभिवृद्धि करना।
-     प्रषिक्षण पूर्व से स्थापित तथा भविष्य में स्थापित होने वाले क्षेत्रीय उद्योगों तथा सर्विस सेक्टर की मांग के अनुरूप एवं समय के साथ परिवर्तनीय हों।
-     प्रत्येक जरूरतमंद युवा को प्रषिक्षण के अवसर उपलब्ध हों जिसमें उम्रए लिंगए स्थान तथा समय की बाध्यता ना हो।
-     परम्परागत हुनर के कारीगरों को विधिवत् तकनीकी प्रशिक्षण देकर उनके ज्ञान एवं कौशल को समृद्ध करना।

लक्षित लाभार्थी

    व्यापक पैमाने पर रोजगार बढाने हेतु, बेरोजगार युवक,युवतियों को स्वरोजगार, उपभोक्ता सेवा एवं उद्योग आधारित रोजगार के लिए तैयार करने, शालात्यागी युवाओं, असंगठित क्षेत्र में संलग्न मजदूरए विभिन्न उपभोक्ता सेवाओं में कार्यरत अकुशल कारीगरों तथा उद्योग से जुड़े मजदूरों के लिए दक्षता आधारित पाठ्यक्रम तैयार करने, प्रशिक्षण देने एवं प्रमाणीकरण करने के उद्देश्य से ये कौशल विकास केन्द्र प्रारंभ किए जाने की योजना है।

निजी एसडीसी प्रारंभ करने हेतु पात्र संस्था /ध्व्यक्ति

-     पंजीकृत कंपनी, फर्म, ट्रस्ट, सोसायटी।
-     पंजीकृत संस्थान
-     स्कूल महाविद्यालय
-     उपयुक्त अधोसंरचना रखने वाले व्यक्ति

निजी एसडीसी प्रारंभ करने हेतु आवश्यक संरचना

भवन

-     एक व्यवसाय हेतु कम से कम 1000 वर्ग फिट का भवन जिसमें 500 से 600 वर्गफिट का प्रायोगिक कक्षाओं हेतु वर्कशॉप तथा 200 से 300 वर्गफिट की सैद्धांतिक कक्षा।
-     एक से अधिक व्यवसाय होने पर प्रति व्यवसाय 1000 वर्गफिट के मान से भवन की उपलब्धता आवश्यक। उदाहरण स्वरूप 04 व्यवसाय के लिए 4000 वर्गफिट भवन की आवश्यकता होगी।

फर्नीचर

-     प्रत्येक क्लास रूम में 20 प्रशिक्षणार्थियों के बैठने हेतु आवश्यक फर्नीचर।
-     प्रत्येक वर्कशॉप में 20 प्रशिक्षणार्थियों के प्रायोगिक कार्य हेतु आवश्यक फर्नीचर।

मूलभूत सुविधाएँ

-      प्रशिक्षणार्थियों एवं अमले के लिए पेयजल, टायलेट इत्यादि की व्यवस्था।

कार्यालयीन व्यवस्था

-     विद्युत, टेलीफोन, कम्प्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, वाई फाई आवश्यक विद्युत भार न्यूनतम 05 किलोवाट अधिकतम संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यकतानुसार।

आवश्यक विद्युत

-     भार न्यूनतम 05 किलोवाट अधिकतम संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यकतानुसार।

आवश्यक मशीन, औजार,उपकरण

-      एमईएस पाठ्यक्रम के लिए एनसीवीटी द्वारा निर्धारित।
-      एमईएस से भिन्न पाठ्यक्रम के लिए एमपीसीवेट द्वारा निर्धारित।

प्रशिक्षक

-     प्रत्येक व्यवसाय हेतु निर्धारित अर्हताधारी 01 प्रशिक्षक।

कौशल विकास केन्द्र में संचालित पाठ्यक्रमों की अवधि

-     03 माह से 09 माह

संचालित किए जाने वाले पाठ्यक्रम

केन्द्र शासन की एमईएस योजना अंतर्गत निर्धारित पाठ्यक्रम।
-      स्थानीय आवश्यकतानुसार एमईएस से भिन्न पाठ्यक्रम बशर्ते यह पाठ्यक्रम एवं आवश्यक मशीनए औजारए उपकरणों की सूची एमपीसीवेट अनुमोदित हो।

प्रशिक्षण शुल्क

-     निजी कौशल विकास संचालनकर्ता प्रशिक्षणार्थियों से प्रशिक्षण शुल्क लेने के लिए स्वतंत्र होंगे। लिए जा रहे प्रशिक्षण शुल्क की जानकारी एमपीसीवेट को लिखित में सूचित करना होगी।

परीक्षा शुल्क

-     प्रति प्रशिक्षणार्थी राशि रूपये 1000/- जो कि निजी कौशल विकास केन्द्र द्वारा एमपीसीवेट या एमपीसीवेट द्वारा अधिकृत परीक्षा एजेंसी को देय होगा।

परीक्षा का आयोजन एवं प्रमाणीकरण एमपीसीवेट द्वारा दायित्व

निजी कौशल विकास केन्द्र के दायित्व निम्नानुसार होंगे

-     आवश्यक अधोसंरचना की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
-     आवश्यक प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
-     प्रशिक्षणार्थियों का चयन एवं प्रवेश।
-     सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक कक्षाओं के लिए फर्नीचर सहित व्यवस्था।
-     सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक कक्षाओं के लिए नवीनतम आवश्यक औजार उपकरणों की व्यवस्था।
-     प्रशिक्षणार्थियों एवं प्रशिक्षण की पूर्णतः माॅनीटरिंग।
-     एमपीसीवेट के पोर्टल पर प्रशिक्षणार्थियों एवं प्रशिक्षण की जानकारी का इंद्राज करना।
-     प्रशिक्षणार्थियों से प्राप्त परीक्षा शुल्क की राशि का एमपीसीवेट को भुगतान करना।
-     प्रशिक्षण में लगने वाली कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
-     प्रशिक्षित प्रशिक्षणार्थियांे के प्लेसमेंट का रिकार्ड केन्द्र में रखना एवं एमपीसीवेट के पोर्टल पर इंद्राज करना।
-     प्रतिवर्ष केन्द्र का नवीनीकरण एमपीसीवेट से निर्धारित शुल्क देकर कराना।
-     एमपीसीवेट एवं डीएलसीवेट के अधिकारियों द्वारा केन्द्र के निरीक्षण के समय आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना।
-     एमपीसीवेट को प्रशिक्षण का फीडबैक उपलब्ध कराना।

एमपीसीवेट के दायित्व निम्नानुसार होंगे

-      व्यवसायिक प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण के घंटे निर्धारित करना।
-     प्रशिक्षणार्थियों की परीक्षा करवानाए मूल्यांकन कराना एवं प्रमाण पत्र जारी करना /कराना|
-     समय-समय पर निजी कौशल विकास केन्द्र में चल रहे प्रशिक्षण की माॅनीटरिंग करना।

निजी कौशल विकास केन्द्र के रूप में संस्था को एमपीसीवेट से पंजीकृत करने की प्रक्रिया

-     एमपीसीवेट द्वारा विज्ञापन जारी किया जाएगा।
-     निर्धारित प्रपत्र में आवेदनकर्ताओं द्वारा एमपीसीवेट में ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।
-     आवेदन शुल्क प्रति केन्द्र रूपये 5000/-
-     आवेदन दिनांक से 15 दिवस के भीतर एमपीसीवेट द्वारा केन्द्र का निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण हेतु राशि रूपये 3000/-
-     निरीक्षणकर्ता की अनुशंसा अनुसार केन्द्र को एमपीसीवेट से संबद्धता दी जावेगी अथवा केन्द्र की कमियाँ सूचित की जावेंगी।
-     कमियों की पूर्ति उपरांत केन्द्र का पुनः निरीक्षण किया जावेगा। इस हेतु केन्द्र द्वारा पुनः राशि रूपये 3000/- का भुगतान करना होगाद्य
-     निजी कौशल विकास केन्द्र के पंजीयन का नवीनीकरण प्रतिवर्ष एमपीसीवेट से कराया जाना अनिवार्य होगा।
-     नवीनीकरण शुल्क रूपये 3000/- प्रति केन्द्र प्रतिवर्ष होगा।
-     पंजीकरण, निरीक्षण एवं नवीकरण हेतु भुगतान HDFC बैंक की किसी भी शाखा में डिमांड ड्राफ्ट / चैक / नगद के द्वारा चालान के माध्यम से किया जा सकेगा, प्रत्येक चालान में CMS कोड अंकित होगा| इसके अतिरिक्त किसी भी अन्य माध्यम से किया गया भुगतान मान्य नहीं होगा|
-    चालान का प्रारूप वेबासाइट पर उपलब्ध है|

निरीक्षण एवं माॅनीटरिंग

-    मध्यप्रदेश व्यवसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद्, भोपाल तथा जिला स्तरीय व्यवसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण समिति द्वारा अनिवार्य होगा।

योजना का कार्यक्षेत्र

-     संपूर्ण मध्यप्रदेश

प्रशिक्षणार्थियों की जानकारी का एमपीसीवेट के पोर्टल पर इंद्राज अनिवार्य होगा।

-     निजी कौशल विकास केन्द्र संचालनकर्ता को एमपीसीवेट के पोर्टल पर प्रशिक्षणए रोजगार/स्वरोजगार की जानकारी का इंद्राज करना

उक्त केन्द्र स्थापित करने के लिए राज्य अथवा केन्द्र शासन द्वारा किसी भी प्रकार का अनुदानए ऋण, प्रशिक्षण अथवा मूल्यांकन शुल्क का भुगतान नहीं दिया जावेगा|